घर बैठे होगी यूरिया, डीएपी खाद की ऑनलाइन बुकिंग, किसानों को बड़ी राहत: राजस्थान सरकार ने किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों, कालाबाजारी और अनावश्यक किसानों से राहत देने के लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। अब किसान घर बैठे ही यूरिया, डीएपी और अन्य सब्सिडी वाले खादों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत किसान रजिस्ट्री आधारित फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स (FFS) प्रणाली लागू की जा रही है।

घर बैठे होगी यूरिया, डीएपी खाद की ऑनलाइन बुकिंग, किसानों को बड़ी राहत, नई डिजिटल व्यवस्था शुरू
अब घर बैठे बुक होगी यूरिया और डीएपी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को खाद लेने के लिए दुकानों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। किसान अपने मोबाइल फोन या ई-मित्र केंद्र के माध्यम से यूरिया, डीएपी और अन्य अनुदानित वस्तुओं की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें एक डिजिटल टोकन मिलेगा, जिसके आधार पर निर्धारित समय पर खाद प्राप्त की जा सकेगी।
इन जिलों से हुई शुरुआत
राजस्थान सरकार ने इस नई व्यवस्था की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिरोही और राजसमंद जिलों में 25 जून 2026 से की है। अगर यह व्यवस्था सफल रहती है, तो जल्द ही इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा।
48 घंटे तक ही मान्य रहेगा टोकन
ऑनलाइन बुकिंग के बाद किसानों को जो डिजिटल टोकन मिलेगा, वह केवल 48 घंटे तक ही मान्य रहेगा। इस अवधि के भीतर किसान को अपने पंजीकृत खाद विक्रेता से खाद प्राप्त करनी होगी। यदि समय पर खाद नहीं ली जाती है, तो टोकन स्वतः हट जाएगा और दोबारा बुकिंग करनी होगी।
Farmer ID से मिलेगी सेवाएं
नई FFS प्रणाली पूरी तरह Farmer ID पर आधारित होगी। इससे केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही सब्सिडी वाली खाद मिल जाएगी। इससे फर्जी रिकॉर्ड, कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
राजस्थान में बन चुकी हैं लाखों Farmer ID
कृषि विभाग के अनुसार राजस्थान में अब तक 86.66 लाख किसानों की Farmer ID बनाई जा चुकी है। इसी डेटाबेस का इस्तेमाल नई प्रणाली में किया जाएगा, जिससे खादों का वितरण पूरी तरह डिजिटल और अनियमित होगा।
किसानों को मिलेंगे ये बड़े फायदे
- घर बैठे खाद की ऑनलाइन बुकिंग।
- लंबी कतारों से छुटकारा।
- खाद की प्राप्ति की पहले से जानकारी।
- कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक।
- वास्तविक किसानों को प्राथमिकता।
- समय और पैसे की बचत।
- सब्सिडी का सही लाभ पात्र किसानों तक पहुंचेगा।