‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना’ हुई लागू
हरियाणा सरकार ने पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना’ शुरू कर दी है। इस योजना के तहत यदि दुधारू गाय या भैंस की बीमारी, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या करंट लगने जैसी वजहों से अकाल मृत्यु हो जाती है, तो पशुपालकों को अधिकतम 1 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य पशुओं की अचानक मृत्यु से किसानों और पशुपालकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, ताकि उन्हें कर्ज या भारी नुकसान का सामना न करना पड़े। योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को अंत्योदय सरल हरियाणा पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होगा।
पशु की उम्र और दूध उत्पादन के आधार पर मिलेगा बीमा कवर
सरकार ने योजना के तहत पशुओं की उम्र और उनकी दुग्ध क्षमता के आधार पर बीमा राशि तय की है।
- दुधारू गाय के लिए निर्धारित आयु सीमा 2 से 10 वर्ष रखी गई है।
- दुधारू भैंस के लिए आयु सीमा 3 से 12 वर्ष तय की गई है।
योजना के अनुसार, एक दुधारू गाय पर 40 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 90 हजार रुपये तक का क्लेम दिया जाएगा। वहीं, दुधारू भैंस की मृत्यु होने पर पशुपालक को अधिकतम 1 लाख रुपये तक का बीमा लाभ मिलेगा।
परिवार पहचान पत्र से जुड़ी है योजना
यह योजना परिवार पहचान पत्र (PPP) से लिंक की गई है। एक परिवार पहचान पत्र पर किसान अधिकतम 10 बड़े पशुओं यानी गाय और भैंस का बीमा करवा सकता है।
इसके अलावा छोटे पशुपालकों को भी योजना में शामिल किया गया है। एक ही PPP ID पर—
- 100 छोटे पशुओं (भेड़-बकरी)
- या 50 सूअरों
का बीमा करवाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
बेहद कम रखा गया है प्रीमियम
सरकार ने पशुधन बीमा योजना का प्रीमियम काफी कम रखा है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें।
यदि बीमा राशि 60 हजार रुपये तक है, तो पशुपालक को कुल प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा ही देना होगा, जो लगभग 250 रुपये के आसपास बनता है। शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
वहीं, 60 हजार रुपये से अधिक के बीमा कवर, जैसे 80 हजार रुपये के बीमा पर किसान को कुल 2.78 प्रतिशत यानी करीब 806 रुपये प्रीमियम के रूप में जमा करने होंगे।
सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के पशुपालकों को विशेष राहत देते हुए उनका पशुधन बीमा पूरी तरह नि:शुल्क कर दिया है।
क्लेम प्रक्रिया को रखा गया पारदर्शी
योजना के तहत क्लेम प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। यदि किसी पशु की मृत्यु दुर्घटना या करंट लगने से होती है, तो बीमा पॉलिसी जारी होते ही उसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
हालांकि बीमारी से पशु की मृत्यु होने की स्थिति में बीमा सुरक्षा पॉलिसी लागू होने के 21 दिन बाद प्रभावी मानी जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पशु चोरी होने की स्थिति में किसी प्रकार का क्लेम नहीं दिया जाएगा।
बीमा करवाने के लिए जरूरी दस्तावेज
पशुधन बीमा योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनमें शामिल हैं—
- सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
- परिवार पहचान पत्र (PPP)
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक की कॉपी
इन दस्तावेजों के आधार पर ही बीमा प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी योजना
सिरसा में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डॉ. सुखविंद्र सिंह ने इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, पशु की अचानक मृत्यु होने पर किसानों को पहले भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब बीमा क्लेम के जरिए इस नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी और पशुपालकों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। इससे किसान बिना आर्थिक जोखिम की चिंता किए पशुपालन व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगे।
