
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी। राज्य के सरकारी शिक्षण संस्थानों में पहली से आठवीं कक्षा तक करीब 12 हजार 827 दिव्यांग विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन्हीं छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग ने विशेष शिक्षा शिक्षकों के 1093 पदों को मंजूरी दे दी है।
स्वीकृत पदों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के लिए 713 पद और छठी से आठवीं तक के लिए 380 पद शामिल किए गए हैं। इन पदों पर नियुक्तियां सीधी भर्ती के माध्यम से की जाएंगी। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नई भर्ती नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। अब इस नीति को लागू करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है।
नई नीति लागू होने के बाद शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के तहत विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य मानी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
फिलहाल हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के जरिए कुल 360 विशेष शिक्षक कार्यरत हैं, जो दिव्यांग बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। इनमें—
- पहली से आठवीं तक के लिए 137 शिक्षक
- माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के तहत 210 शिक्षक
- नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB) के माध्यम से 13 शिक्षक
संविदा आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से अधिकतर शिक्षक पिछले 10 वर्षों से कार्यरत बताए जा रहे हैं।
समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार 60:40 अनुपात में फंड उपलब्ध कराती हैं।
पहली से पांचवीं तक 7127 दिव्यांग छात्र
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया द्वारा तैयार की गई नई नीति में वर्ष 2022-23 की व्यवस्था को आधार बनाया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 7127 दिव्यांग छात्र अध्ययन कर रहे हैं।
सरकार ने प्रत्येक 10 बच्चों पर एक विशेष शिक्षक नियुक्त करने का फैसला लिया है। इसी आधार पर इस श्रेणी में 713 शिक्षकों की भर्ती होगी।
वहीं छठी से आठवीं तक प्रत्येक 15 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी। इस श्रेणी में 380 विशेष शिक्षकों के पद भरे जाएंगे।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद स्क्रीनिंग समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद नियमों की अधिसूचना जारी होते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सभी शिक्षकों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
हरियाणा सरकार अब विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम और लर्निंग डिसएबिलिटी जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में भी विशेष मॉड्यूल शामिल करने की तैयारी चल रही है, ताकि भविष्य के शिक्षक भी ऐसे बच्चों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
वर्तमान समय में 300 से अधिक प्रशिक्षुओं को इस दिशा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य शिक्षा व्यवस्था में बेहतर अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।