
नई दिल्ली। देश में बिजली व्यवस्था को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं। Government of India की Revamped Distribution Sector Scheme के तहत पुराने बिजली मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी पर नियंत्रण पाना, बिलिंग प्रक्रिया को स्वचालित बनाना और उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराना है। आइए जानते हैं कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या होते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं।
क्या होते हैं स्मार्ट बिजली मीटर?
स्मार्ट बिजली मीटर एक आधुनिक डिजिटल डिवाइस होता है, जो बिजली की खपत को रियल टाइम में रिकॉर्ड करता है और यह डेटा सीधे बिजली वितरण कंपनी के सर्वर तक पहुंचा देता है। पारंपरिक मीटरों के विपरीत इसमें मैन्युअल रीडिंग लेने की जरूरत नहीं होती।
यह मीटर उपभोक्ता और बिजली वितरण कंपनी के बीच दो-तरफा संचार स्थापित करता है, जिससे बिजली की खपत, बिलिंग और सप्लाई से जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त हो जाती है।
स्मार्ट मीटर के प्रकार
प्रीपेड स्मार्ट मीटर
इस प्रकार के मीटर में उपभोक्ताओं को पहले से बैलेंस रिचार्ज करना होता है, बिल्कुल मोबाइल की तरह। बैलेंस समाप्त होने पर बिजली सप्लाई स्वतः बंद हो जाती है।
पोस्टपेड स्मार्ट मीटर
यह मीटर पारंपरिक सिस्टम की तरह काम करता है, जिसमें महीने के अंत में बिल जनरेट होता है, लेकिन इसमें खपत का डेटा स्वतः रिकॉर्ड होता रहता है।
टाइम-ऑफ-डे (ToD) मीटर
इस तरह के मीटर में बिजली की दर समय के अनुसार बदलती रहती है। पीक समय में बिजली महंगी होती है, जबकि ऑफ-पीक समय में सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध होती है।
कैसे काम करती है स्मार्ट मीटर तकनीक?
स्मार्ट मीटर उन्नत संचार प्रणाली पर आधारित होते हैं, जिसे Advanced Metering Infrastructure कहा जाता है। इस तकनीक में मुख्य रूप से तीन घटक शामिल होते हैं।
पहला, स्मार्ट मीटर डिवाइस जो घर या कार्यालय में लगाया जाता है।
दूसरा, कम्युनिकेशन नेटवर्क जो RF, GPRS या NB-IoT जैसी तकनीकों के माध्यम से डेटा ट्रांसफर करता है।
तीसरा, डेटा मैनेजमेंट सिस्टम जो इस जानकारी को स्टोर और प्रोसेस करता है।
यह पूरी प्रणाली मिलकर उपभोक्ता की बिजली खपत से जुड़ी जानकारी को कुछ ही मिनटों में अपडेट करती रहती है, जिससे उपभोक्ता और बिजली कंपनियां दोनों को सटीक और तुरंत जानकारी मिलती है।