
Indian Railways: भारतीय रेलवे यात्रियों को बेहतर और तेज टिकट बुकिंग सुविधा देने के लिए अगस्त से अपना चार दशक पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) बदलने जा रहा है। मौजूदा पीआरएस सिस्टम वर्ष 1986 में शुरू किया गया था, जो इटेनियम सर्वर और ओपन वीएमएस तकनीक पर आधारित है। अब इसे आधुनिक क्लाउड आधारित सिस्टम से बदला जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नया सिस्टम यात्रियों को तेज बुकिंग, बेहतर सीट चयन और बहुभाषी इंटरफेस जैसी कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
क्या है पीआरएस सिस्टम?
पीआरएस यानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम भारतीय रेलवे का केंद्रीय कंप्यूटर नेटवर्क है, जो रेलवे आरक्षण काउंटर, IRCTC वेबसाइट और मोबाइल एप को एक साथ जोड़ता है। देश में करीब 88 प्रतिशत ट्रेन टिकट इसी प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। यही सिस्टम वेटिंग लिस्ट, तत्काल कोटा, सीट उपलब्धता और आरक्षण प्रबंधन का काम संभालता है।
पांच गुना बढ़ेगी टिकट बुकिंग क्षमता
मौजूदा सिस्टम एक मिनट में लगभग 32 हजार टिकट बुक करने में सक्षम है, जबकि नए क्लाउड आधारित सिस्टम में यह क्षमता बढ़कर 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक पहुंच जाएगी।
इसके अलावा ट्रेन उपलब्धता जांचने की क्षमता भी 4 लाख से बढ़ाकर 40 लाख प्रति मिनट कर दी जाएगी। इससे दीपावली, होली और गर्मी की छुट्टियों जैसे पीक सीजन में ‘सर्वर डाउन’ और ‘बुकिंग फेल’ जैसी समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
एयरलाइन की तरह सीट चुनने की सुविधा
नए सिस्टम में यात्रियों को एयरलाइन की तरह सीट चयन का विकल्प मिलेगा। परिवार या समूह एक साथ सीट बुक कर सकेंगे। साथ ही फेयर कैलेंडर फीचर भी उपलब्ध होगा, जिससे अलग-अलग तारीखों का किराया आसानी से देखा जा सकेगा।
दिव्यांगजनों और मरीजों के लिए विशेष इंटीग्रेटेड सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी। पूरा इंटरफेस हिंदी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विभिन्न राज्यों के यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
RailOne एप बनेगा नए सिस्टम का आधार
रेलवन एप नए पीआरएस सिस्टम का मोबाइल इंटरफेस होगा। रेलवे के अनुसार, एआई आधारित यह एप यात्रियों को यह अनुमान भी देगा कि वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की संभावना कितनी है।
रेलवे का दावा है कि टिकट कन्फर्मेशन अनुमान की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 9.29 लाख टिकट इसी एप के जरिए बुक किए जा रहे हैं।